ज्वाला देवी मंदिर में सदियों से कई ज्वालाएं जल रही है।

इन ज्वालाओं के आदि-अंत के बारे में किसी को पता नहीं है।।

इस्लामिक हमलावरों ने सनातन को नष्ट करने के लिए इन ज्वालाओं को मिटाना चाहा लेकिन मिटा नही सका।

मलेछ्यो ने ज्वालाओं की तरफ नदिया मोड़ दी, उसे पत्थर और लोहा के चादरों से ढका।

लेकिन इन ज्वालाएं ना ही जल से बुझी और ना ही लोहा की चादरों से।

लेकिन इन ज्वालाएं ना ही जल से बुझी और ना ही लोहा की चादरों से।

अंततः ये सभी क्रूर आक्रमणकारी हार कर लौट गया।।

यहां पर 09 ज्वालाएं एक साथ जल रही है जिसे ईसाई और अंग्रेजो ने भी जानना चाहा किंतु असफलता मिली।

ये ज्वालाएं राजस्थान के कांगड़ जिले के ज्वालामुखी एरिया में स्थित है

ये ज्वालाएं राजस्थान के कांगड़ जिले के ज्वालामुखी एरिया में स्थित है

सनातन संस्कृति के अनुसार माता सती का जीभ इस स्थान पर गिरा था इसलिए अग्नि प्रज्वलित हो गई।।

इन ज्वालाओं के पास सबसे पहले ज्वाला माता मंदिर राजा भूमिचंद द्वारा करवाया गया था।

इन ज्वालाओं के पास सबसे पहले ज्वाला माता मंदिर राजा भूमिचंद द्वारा करवाया गया था।

वैज्ञानिकों ने भी अपनी बहुत बुद्धि खपाई किंतु कुछ पता नहीं चल सका आखिर ज्वाला क्यों जल रही है।।

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इस ज्वाला माता मंदिर के पास कांगड़ा रेलवे स्टेशन द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।